बॉर्डर 2 – क्या हम सच में इमोशनली पत्थर हो गए हैं या फिल्म में ही दम नहीं? वरुण धवन और सनी देओल का जलवा या सिर्फ कहानी का हलवा? मेरा ‘Honest’ रिव्यू!

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1997 में रोंगटे खड़े हुए थे, 2026 में क्यों नहीं?* “वैसे तो ‘बॉर्डर 2’ को रिलीज हुए बहुत दिन हो गए और ‘धुरंधर’ देखने के बाद ‘बॉर्डर 2’ को भी बड़ी स्क्रीन पर देखने का बहुत मन था, लेकिन व्यस्तता के चलते टाइम ही नहीं मिल पा रहा था। बहरहाल…. कल जाकर फिल्म देख आई, लेकिन कुछ पॉइंट्स पर मुझे फिल्म ने डिसएपोइंट किया जो आपसे भी साझा कर रही हूँ।

एक चीज जो बहुत अजीब लगी: – भारत की आर्मी की पाकिस्तान से लड़ाई दो फ्रंट्स पर हो रही है—एक जगह वरुण धवन हैं और दूसरा मोर्चा सनी पाजी ने संभाला हुआ है। दोनों जगह पाकिस्तान टैंक लेकर पहुँच रहा है। दोनों ही मोर्चों पर हमारी आर्मी को यह टेंशन है कि पाकिस्तान के फौजियों की संख्या हमारे फौजियों की संख्या से बहुत ज्यादा है। मुझे कोई बताए, क्या 1971 में पाकिस्तान की आर्मी हमारी आर्मी से बड़ी थी? ठीक है….. आप हमारे सोल्जर्स को शायद बहुत बहादुर दिखाना चाहते हो कि हमने कम संख्या होने पर भी बहादुरी से लड़ाई जीती। पर फैक्ट्स का क्या?? 🤔 एक गाँव पर कब्जा करने के लिए पाकिस्तान पांच-पांच टैंकों से हमला कर रहा है और इधर से सिर्फ सनी पाजी लड़ रहे हैं क्या? अरे….एक-दो टैंक हमारी आर्मी को भी दे देते, हम क्या इतने गरीब थे? अब आप कहेंगे कि ज्यादा आर्मी दूसरे फ्रंट यानी बांग्लादेश पर थी, तो वह तो पाकिस्तान की सेना भी वहां थी। क्या 1971 के पाकिस्तान के पास 1971 के भारत से बड़ी सेना थी?🥺🥺

तीनों सेनाओं का हलवा— पिछली ‘बॉर्डर’ में सिर्फ आर्मी ही मुख्य थी और थोड़ा बहुत स्क्रीन टाइम एयर फ़ोर्स को दिया गया था। लेकिन इस बार की ‘बॉर्डर’ में तीनों सेनाओं का शौर्य दिखाने के चक्कर में सब ‘हलवा’ हो गया या आप इसे ‘खिचड़ी’ भी कह सकते हैं🤪 तीनों सेनाओं के लीड हीरो की शादियां भी दिखानी थीं…उनकी दोस्ती कैसे हुई इसका प्लॉट भी देना था…फिर तीनों का करेज दिखाने के लिए तीनों का पाकिस्तान से दो-दो हाथ भी दिखाना था… जिसमें से दो को तो मार भी दिया—मेरा मतलब है कि शहीद भी करा दिया। फिर मुख्य हीरो यानी कि सनी पाजी, जिनकी लंबी पारी थी पिछली ‘बॉर्डर’ से नई ‘बॉर्डर’ तक, उनका परिवार भी तो दिखाना था…वहां इमोशनल एंगल देने के लिए उनके बेटे की शहादत का एंगल भी डाला, पर सच कहूँ तो पूरी फिल्म में एक भी सीन पर ना तो मैं इमोशनल हुई और ना ही पिछली ‘बॉर्डर’ जैसे मेरे रोंगटे खड़े हुए….कि भाई अब आगे क्या होगा!😳😳लगता है 1997 से 2026 तक मैं ही ज्यादा इमोशनली स्ट्रांग हो गई हूँ कि इमोशनल सीन पर भी अब ना मुझे इमोशनल होना आता है और ना ही वॉर के सीन पर मेरे रोंगटे खड़े होते हैं। वैसे आपको ‘बॉर्डर 2’ कैसी लगी? मुझे कमेंट्स में जरूर बताएं।

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