
बचपन से लेकर आज तक हमने तो होली दो ही देखी थी —एक छोटी होली, और एक बड़ी होली।
सिस्टम एकदम क्लियर था।छोटी होली मतलब — रात में लकड़ी जलाओ, होलिका दहन करो, घर आकर गुजिया खाओ और सो जाओ।बड़ी होली मतलब — सुबह से रंग, गुलाल, पिचकारी, और शाम तक पहचान में ना आने वाली शक्ल।
सीधी-सादी जिंदगी थी।
लेकिन पिछले कुछ सालों से त्योहारों का भी “अपडेटेड वर्ज़न” आ गया है।अब तो समझ ही नहीं आता — त्योहार शुरू कब हुआ और खत्म कब हो गया!
रात को लोग स्टेटस डाल रहे होते हैं — “हैप्पी होली 🌈”सुबह उठो तो कोई और कह रहा होता है — “आज असली होली है।”और दोपहर तक तीसरा मैसेज — “आज रंग वाली होली है।”
अब भाई, हम कौन सी वाली मनाएँ? 😄
इस बार तो कमाल ही हो गया।छोटी होली और बड़ी होली के बीच में एक नई एंट्री हो गई —मंजली होली!
अब दिमाग में सवाल आया —छोटी होली पर दहन करना है,बड़ी होली पर रंग खेलना है,तो मंजली होली पर क्या करना है?बैठकर सोच रही थी —क्या इस दिन आधी लकड़ी जलाते हैं?या सिर्फ आधा गुलाल लगाते हैं?
या फिर ये वो दिन है जब लोग कन्फ्यूजन में बस व्हाट्सएप स्टेटस ही बदलते रहते हैं?
😂आज तक तो हमने मंजली होली मनाई ही नहीं,तो समझ ही नहीं आया कि इस दिन की ड्यूटी क्या है।
पहले त्योहार दिल से मनते थे,अब कैलेंडर, पंचांग, छुट्टी और सोशल मीडिया के हिसाब से मनते हैं।कोई एक दिन पहले मना रहा है,कोई एक दिन बाद,और कुछ लोग तो तीनों दिन “सेफ साइड” में मना लेते हैं।
सच कहूँ तो बचपन वाला सिस्टम ही बेस्ट था —दो दिन की होली,एक दिन दहन,एक दिन रंग,और तीसरे दिन नहाकर इंसान की शक्ल वापस लाना।
बाकी ये मंजली होली तो शायद कन्फ्यूजन की ब्रांड एंबेसडर है।
लेकिन चलो, एक फायदा तो है —अब अगर किसी दिन रंग खेलने का मन ना हो,तो बोल सकते हैं —“अरे आज तो मंजली होली है, आज हल्का ही खेलेंगे।” 😄
त्योहार चाहे दो दिन के हों या तीन,रंग एक ही चीज़ का होना चाहिए —खुशी का।
बाकी छोटी, बड़ी और मंजली…ये सब तो कैलेंडर की कहानी है।हम तो बस गुजिया और मस्ती के साथ ही खुश हैं! 🎉🌈
वैसे आप लोगों ने मंजली होली पर क्या किया? मुझे कमेंट्स में ज़रूर बताएं! 🤪
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